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21/03/2009

इन्सान अब बुत बनने लगे हैं – हास्य व्यंग्य कविताएँ


असली इंसानों के चेहरे अब बुत की तरह नजर आते।
लिखता कोई और संवाद, वह बोलते हुए दिख जाते।।
बहुत पढ़ लिख गये इंसान, पर सोच कहीं हो गयी गुम
कागज पर शब्द तो लिखते, पर जब कहीं से इशारे आते।।
अपनी आंखों से देखे दृश्य, इंसान की समझ से परे होते
तस्वीरें बनाने के लिये नजरिया कहीं से उधार मांग लाते।।
इंसान की काबलियत अब उसके शऊर से नहीं कोई आंकता
बल्कि पैसे से खरीदी तालियों पर प्रसिद्धि भी घर आती।।

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1 Comment »

  1. hey very good bhut accha likha ha tumne

    Comment by googlebizkit — 22/09/2009 @ 12:00 am


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