साली और भाभी पर जो
कोई ख्याली शेर लिखा
पढ़ते हुए उसे लोगों का ढेर दिखा।
जो बयान किये दर्द जमाने के
उसे पढ़ने से कतराये सभी
कैसा यह फेर दिखा।
……………………….
जिनके दिल में दर्द है
भला वह उससे सजे शब्द पढ़कर
क्या पायेंगे
जिनके दिमाग और घर हैं
खुशी और दुःख से खाली
वह ढूंढ रहे हैं किताबों और कंप्यूटर पर
कल्पित साली और भाभी
मनोरंजन घर की है उनके लिये यही चाभी
बढ़ गयी है पूरी दुनियां
देश के जवान अभी पीछे हैं
सीख ली अंग्रेजी
पहुंच गये ऊपर पर
नजरें अभी भी नीचे हैं
अपनी कभी रास न आये घरवाली
कहीं ढूंढे भाभी तो कहीं साली
बरसों पहले भी यही था
अब भी यही चला रहा है
जमाने में कभी नहीं फेर दिखा
………………………………
यह आलेख इस ब्लाग ‘राजलेख की हिंदी पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिकालेखक संपादक-दीपक भारतदीप








![Sitting On The Dock Of The Bay [ Explored] 17/06/2013 Sitting On The Dock Of The Bay [ Explored] 17/06/2013](http://static.flickr.com/2823/9069502856_abcb4f263f_t.jpg)


टिप्पणियाँ
वैरी गुड
जोली अंकल