इस दुनियां में होते हैं नाटक अपार-व्यंग्य कविता


क्यों अपना दिल जलाते हो अपना यार
इस दुनियां में होते हैं नाटक अपार

कभी कहीं कत्ल होगा
कहीं कातिल का सम्मान होगा
चीखने और चिल

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