देशभक्ति के भाव को सस्ता बनाने से लाभ नहीं-आलेख (deshbhakti ka bhav-hindi article)


हम बचपन में 15 अगस्त और 26 जनवरी पर स्कूल में जाते थे तब पहले रेडियो पर तथा बाद में राह चलते हुए दुकानों पर देशभक्ति के गीत सुनते हुए मन में एक जोश पैदा होता था। स्कूल में झंडावदन करते हुए मन में देश के लिये जो जज्बा पैदा होता था वह आज भी है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि हम यह मान लें कि यह हमारे अंदर ही है और इसलिये बाकी सभी में जगाते फिरें। वैसे भी आपातकाल में देश धर्म, जाति, भाषा या और क्षेत्रीय समूहों का मोह छोड़कर देशभक्ति दिखाते हैं। इसलिये सामान्य समय में होने वाले झगड़ों को देखकर यह भ्रम नहीं पालना चाहिये कि देश की एकता को खतरा है। इन्हीं सामान्य समयों में हल्के फुल्के अंतराष्ट्रीय वाद विवादों पर यह भी नहीं करना चाहिये कि देश के लोगों से उनको देशभक्ति का भाव जाग्रत करने का अभियाना बिना किसी योजना के प्रारंभ कर दें। इस देश को हर नागरिक संकट के समय बचाने आयेगा-भले ही वह अपनी रक्षा के स्वार्थ का भाव रखे या निष्काम भाव-इस पर विश्वास रखना चाहिए।

मगर कुछ लोगों के मन में देशभक्ति का भाव कुछ अधिक ही रहता है। उनकी प्रशंसा करना चाहिये। मगर जब सामान्य समय में वह हर छोटे मोटे विवाद पर देश में देशभक्ति का भाव दिखाते हुए दूसरे से भी तत्काल ऐसी आशा करते हैं कि वह भी ऐसी प्रतिक्रिया दे तब थोड़ा अजीब लगता है। अंतर्जाल पर हमारे ही एक मित्र ब्लाग लेखक ने भी ऐसा उतावलापन दिखाया। हमें हैरानी हुई। मामला है गूगल द्वारा अपने मानचित्र में भारत के अधिकार क्षेत्र को चीन में दिखाये जाने का! यह खबर हमने आज एक होटल में चाय पीते हुए जी न्यूज में भी देखी थी। बाद में पता लगा कि इस पर हमारे मित्र ने बहुत जल्दी अपनी प्रतिक्रिया दे दी। गूगल के ओरकुट से अपना परिचय हटा लिया। ब्लागर से ब्लाग उड़ा दिये। बोल दिया गूगल नमस्कार!
उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि सभी ऐसा करें पर उनकी प्रतिष्ठता और वरिष्ठता का प्रभाव यह है कि अनेक ब्लाग लेखकों ने अपनी तलवारें निकाल ली-आशय यह है कि अपनी टिप्पणियों में देशभक्ति का भाव दिखाते हुए आगे ऐसा करने की घोषणा कर डाली।
एक ब्लागर ने असहमति दिखाई। इसी पाठ में ब्लाग लेखक के मित्र भ्राताश्री ने ही यह जानकारी भी दी कि गूगल के प्रवक्ता ने अपनी गलती मानी है और वह इसे सुधारेगा। समय सीमा नहीं दी।’
अब यह पता नहीं है कि आगे दोनों भ्राता क्या करने वाले हैं? मगर हिंदी ब्लाग आंदोलन को जारी रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इसी कारण लोग उन्हें अपनी मुखिया भी मानते हैं इसलिये उनके इस तरह के प्रयासों का ब्लाग जगत पर प्रभाव पड़ता है। मुख्य बात यह है कि इस तरह देशभक्ति का सस्ता बनाने का प्रयास लगता है।
इस तरह के अनेक विवादास्पद नक्शे आते रहते हैं और सरकारी तौर पर उसका विरोध होने पर बदलाव भी होता है। ऐसे में गूगल के विरुद्ध इस तरह का अभियान छेड़ने का का आव्हान थोड़ा भारी कदम लगता है खासतौर से तब जब आपने अभी कहीं औपचारिक विरोध भी दर्ज न कराया हो।
इन पंक्तियेां के लेखक को ब्लाग लिखने से कोई आर्थिक लाभ नहीं है। गूगल का विज्ञापन खाता तो अगले दस साल तक भी एक पैसा नहीं दे सकता। उसके विज्ञापन इसलिये लगा रखे हैं कि चलो उसकी सेवाओं का उपयेाग कर रहे हैं कि तो उसे ही कुछ फायदा हो जाये। सबसे बड़ी बात यह है कि आजादी के बाद हिंदी की विकास यात्रा व्यवसायिक और अकादमिक मठाधीशों के कब्जे में रही है। देश में शायद चालीस से पचास प्रसिद्ध लेखक ऐसे हैं जिनको संरक्षण देकर चलाया गया। बजाय हिंदी लेखकों को उभारने के अन्य भाषाओं से अनुवाद कर हिंदी के मूल लेखन की धारा को बहने ही नहीं दिया गया। आज भी अनेक हिंदी अखबारों में ऐसे बड़े लेखक ही छपते हैं जो अंग्रेजी में लिखने की वजह से मशहूर हुए पर हिंदी में नाम बना रहे इसलिये अपने अनुवाद हिंदी में छपवाते हैं।
व्यवसायिक प्रकाशनों में हिंदी लेखक से लिपिक की तरह काम लिया गया। आज इस देश में एक भी ऐसा लेखक नहीं है जो केवल लिखे के दम ही आगे बढ़ा हो। ऐसे में अंतर्जाल पर गूगल ने ही वह सुविधा दी है जिससे आम लेखक को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। हम जैसे लेखकों के लिये तो इतना ही बहुत है कि लिख पा रहे हैं। ऐसे अनेक लेखक हैं जो बहुत समय से लिख रहे हैं पर देश में उनकी पहचान नहीं है और वह अंतर्जाल पर आ रहे हैं।
गूगल का प्रतिद्वंद्वी याहू हिंदी के लिये किसी भी तरह उपयोगी भी नहीं है जबकि भारत का आम आदमी उसी पर ही अधिक सक्रिय है। न वह लिखने में सहायक है न पाठक देने में। गूगल के मुकाबले याहू का प्रचार भी कम बुरा नहीं है वह भी ऐसे मामले में जिसके निराकरण का प्रयास अभी शुरु भी नहीं हुए। हमें याहू के प्रचार पर ही भारी आपत्ति है क्योंकि वह किसी देशभक्ति का प्रतीक नहीं है। इधर समाचारों में यह पता भी लगा कि आधिकारिक रूप से नक्शे का विरोध दर्ज कराया जायेगा-उसके बाद की प्रतिक्रिया का इंतजार करना होगा। उसके बाद भी ब्लाग लेखकों से ऐसे आव्हान करने से पहले अन्य बड़े व्यवसायिक तथा प्रतिष्ठित लोगों से भी ऐसी कार्यवाही करवानी होगी। अपना पैसा खर्च कर ब्लाग लिखने वाले ब्लाग लेखकों में यह देशभक्ति का भाव दिखाने का खौफ तभी पैदा करें जब उसे विज्ञापन देने वाले बड़े संस्थान पहले उसके पीछे से हट जायें। अपने कुछ पल लिखने में आनंद से गुजारने वाले ब्लाग लेखक यह अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके देशभक्ति दिखाने का वक्त कौनसा है? हालांकि यह जानकारी मित्र ब्लाग लेखक पर दर्ज है कि गूगल अपनी गलती स्वीकार कर चुका है।
वैसे मान लीजिये यह गलती अभी स्वीकार नहीं गयी होती तो भी तत्काल इस तरह के आव्हान करना ठीक नहीं है। यह देशभक्ति को सस्ता बनाने जैसा है। हम ब्लाग लेखक भले ही गूगल के समर्थक हैं पर आम प्रयोक्ता वैसे ही याहू समर्थक है। गूगल को भारत में अभी बहुत सफर तय करना है और उसे यह नक्शा बदलना ही होगा। यह लेखक अपने मिलने वालों से यही कहता है कि गूगल का उपयोग करो। आप यकीन करिये जिन लोगों ने गूगल का उपयोग हिंदी के लिये शुरु किया तो भले ही सभी ब्लाग लेखक नहीं बने पर वह उसका उपयोग करते हैं और याहू से फिर वास्ता नहीं रखते। सर्च इंजिन में हिंदी के विषय जिस तरह गूगल में दिखते हैं वह हिंदी के लिये आगे बहुत लाभप्रद होगा।
इस तरह के विवाद जिन पर हमारा निजी रूप से बस नहीं है उनके लिये इस तरह के आव्हान करना अतिआत्मविश्वास का परिचायक है। जब सभी लोग आपको बिना विवाद के अपना मुखिया मानते हैं तब आपको सोच समझकर ही कोई बात कहना चाहिये- खासतौर से जब देशभक्ति जैसा संवेदनशील विषय हो। इधर चीन का डर पैदा करने का प्रयास चल रहा है। आप भारतीय सेना की ताकत जानते हैं। भारत की एक इंच जमीन लेना भी अब आसान उसके लिये नहीं है। ऐसे कागजी नक्शे तो बनते बिगड़ते रहते हैं उनसे विचलित होना शोभा नहीं देता-खासतौर से जब आप लेखक हों ऐसी कई घटनाओं पर लिख चुके हों।
……………………………….
‘दीपक भारतदीप की हिन्दी-पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका
लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

टिप्पणियाँ

  • Dilkhushmanjhi  On 18/12/2013 at 8:00 अपराह्न

    Mera name Dilkhush hai,Mai 11th class ka chhatr hoo,mai apne Bharat desh se bahut payr karta hoo,

  • basant nishad  On 21/01/2015 at 6:19 अपराह्न

    देशप्रेम मानव में निहित ऐसी भावना है जो हमें अपने मातृभूमि के प्रति कृतज्ञ बनाती है। देशप्रेम के कारण ही किसी देश के निवासियों में अपने देष के प्रति श्रद्धा की भावना जागृत होती है। यह मानव को निज स्वार्थ से ऊपर उठकर मातृभूमि के लिए कुछ करने को प्रेरित करती है। इसी भावना से अंगीभूत होकर लोग देश की मर्यादा को कायम रखने हेतु अपने प्राण तक को न्योछावर करने में तनिक भी झिझक नहीं करते हैं।

    देशप्रेम से जुड़ी असंख्य कथाएं इतिहास के पन्नों में दर्ज है। हर एक देश में उस देश के लिए मर मिटने वाले लोगों और देशप्रेम से जुड़ी घटनाएं सहज ही मिल जाएंगी। ऐसे में भारत जैसे विशाल देश में इसके असंख्य उदाहरण दृषिटगोचर होते हैं। हम अपने इतिहास के पन्नों में झांक कर देखें तो प्राचीन काल से ही अनेक वीर योद्धा हुए जिन्होंने भारतभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राण तक को न्योछावर कर दिए। पृथ्वीराज चौहाण, महाराणा प्रताप, टीपू सुल्तान, बाजीराव, झांसी की रानी लक्ष्मीबार्इ, वीर कुंवर सिंह, नाना साहेब, तांत्या टोपे, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, खुदीराम बोस, सुभाषचंद्रबोस, सरदार बल्लभ भार्इ पटेल, रामप्रसाद विसिमल जैसे असंख्य वीरों के योगदान को हम कभी नहीं भूल सकते। इन्होंने मातृभूमि की रक्षा हेतु हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। विदेशियों को देश से दूर रखने और फिर स्वतंत्रता हासिल करने में इनका अभिन्न योगदान रहा। आज हम स्वतंत्र परिवेश में रह रहे हैं। आजादी ही हवा में हम सांस ले रहे हैं, यह सब संभव हो पाया है अनगिनत क्रांतिकारियों और देशप्रेमियों के योगदान के फलस्वरूप। लेखकों और कवियों, गीतकारों आदि के माध्यम से समाज में देशप्रेम की भावना को प्रफुल्लित करने का अनवरत प्रयास किया जाता है।

    वैसे तो हर व्यकित में अपने देश के प्रति देशप्रेम की भावना किसी न किसी रूप में मौजूद होती ही है, अपितु हर व्यकित इसे जाहिर नहीं कर पाता। हमें अपने देशप्रेम की भावना को अवश्य उजागर करना चाहिए। इसी भावना से ओत-प्रोत होकर खिलाड़ी खेल के मैदानों पर और सैनिक सीमा पर असाधारण प्रदर्शन कर जाते हैं। अगर हर व्यकित अपने दायित्वों का निर्वाह भलीभांति करेगा और न खुद से तथा न किसी अन्य के साथ गलत करेगा तो यह उसका अपने देश के लिए एक उपहार ही होगा। इसे भी देशप्रेम के रूप में चिन्हित किया जा सकता है। अतः देश के हर निवासी को कुछ ऐसा करना चाहिए कि हमारे देश के इतिहास में हमारा नाम सदा सर्वदा के लिए अमर हो जाए और लोग हमेशा हमारे योगदान की सराहना करें।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: